आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - मौलिक सृजन पर गहराते चुनौतियों के बादल [Artificial Intelligence - Clouds of Deepening Challenges on Original Creation]
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - मौलिक सृजन पर गहराते चुनौतियों के बादल
Artificial Intelligence - Clouds of Deepening Challenges on Original Creation
Looking through the lens of the past, it's shocking
दूरसंचार विभाग में कई सेवाओं के
कंप्यूटरीकरण की शुरुआत 1994 के
समय हुई थी । उत्तर प्रदेश में कानपुर शहर
को इस हेतु चुना गया था । तब मैं कार्याधिकारी के पद पर रहते हुए इस प्रोजेक्ट के
निष्पादन में सभी तकनीकी और व्यावसायिक तथा कार्मिक पहलू पर अकेला जानकार था । उस
दौरान काम करते हुए कार्मिक यूनियन से प्रशासनिक दफ्तर तक की सीधी जवाबदेही में, तमाम कठिनाइयों से दो चार होते हुए
मैंने तब बड़ी सफलता अर्जित की थी ।
युवाओं को जानकार आश्चर्य होगा कि उन
दिनों कंप्यूटर के प्रति जागरूकता पूरी शून्य थी । तब संदेह और भ्रम काफी ज्यादा
थे । जिन्हे कम्प्यूटर “की
बोर्ड” पर काम करना था वे कागज और कलम को
छोड़ने को राजी नहीं थे । आज इस दिशा में जो दिख रहा है तब ऐसी कल्पना भी नहीं की
जा सकती थी । मुझे तब के मिले “प्रशस्ति पत्रों” में उस समय की जिन चुनौतियों और उपलब्धियों का जिक्र है , वे सारे संदर्भ आज मेरे सामने
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विषय में जिंदा होकर सामने आ रहे हैं । पहले मानवीय
कार्य शक्ति के मुक़ाबले में कम्प्यूटर खड़ा हो रहा था जबकि वर्तमान में मानवीय
कल्पना शक्ति और चिंतन- मनन के सामने एक प्रतिद्वंदी की तरह आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस नामक नयी तकनीक खड़ी है । मुक़ाबला मानव का रोबोट से हो यह उसकी पहली कड़ी
है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है ।
यह कल्पना से परे लगा बिकुल अद्भुत
it felt amazing beyond imagination
ज़्यादातर लोगों के सामने आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस अभी एक थ्योरी जैसा है जबकि मुझे अब इसका रूप दिखने लगा है । अभी हाल
में मेरे फेस बुक में एक व्यावसायिक आफ़र मुझे मिला जिसकी तस्वीर इस लेख में दे रहा
हूँ । इस आफ़र में मुझे एक बार में एक समय में कुछ राशि को भुगतान करने के लिए कहा
गया । विज्ञापन के माध्यम से मुझे मिले इस प्रस्ताव को जब मैंने बारीकी के साथ
देखा तो पाया कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ही एक उत्पाद है । इस उत्पाद के
द्वारा आपमें एक भी शब्द को लिखने की ताकत नहीं रहते हुए भी मात्र 2 मिनट की अवधि में एकदम नयी अद्भुत “ई बुक” या “ई मैगजीन” को कस्टोमाइज करते हुए बना देने की
क्षमता का दावा दिया गया है ।
यह मेरे जैसे कवि गीतकार या मौलिक लेखन
करने वाले के लिए इलेक्ट्रिक शॉक से कम का झटका नहीं था । इसका सीधा अर्थ यह हुआ
कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह उत्पाद हमें ई-मैगजीन के लिए आवश्यक ले आउट , तस्वीरें , हेडिंग , आलेख आदि सभी घटक को खुद हमारे सामने
हमारी योजना और हमारी इच्छा को समझते हुए प्रस्तुत करता जाएगा । हमारे कम्प्यूटर
के माउस की एक क्लिक से यह सब हमारी “ई बुक”
या “ई मैगजीन” में छपता चला जाएगा । यानि कठिनाइयों
से भरा डिजाइन के काम जैसे पेज सेटिंग , फोटो सेटिंग , फॉन्ट साइज , फॉन्ट
कलर एवं ग्राफिक्स आदि का उसका स्वचालित सुझाव हमारे मन में चल रहे विचार के
अनुकूल होता चला जाएगा और हम स्वयं एक ई बुक बना सकेंगे ।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह
लेखन-सहायक एक अद्भुत ई-बुक को हमारे नाम से मात्र 2 मिनट में बिना एक शब्द लिखे ही तैयार
करने का दावा कर रहा है । इसका अर्थ यह हुआ कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह
उत्पाद हमारे लिए ,
हमारी
इच्छा के अनुसार ही एक ई-मैगजीन का निर्माण उसी तर्ज में करके रख देगा जिस तर्ज
में “मैगी कंपनी” इसे पकाने के समय को अपने चर्चित
विज्ञापन में दिखाती है “मैगी
बस 2 मिनट” । अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लेखन
के क्षेत्र में “प्लग एंड प्ले” या “रेडी टु मूव” की नयी स्थित पैदा करने की स्थित में आ
ही गया ।
क्या है आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस
What is artificial intelligence
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है ? यह एक कृतिम बुद्धि है । यह एक मशीनी
मानसिक शक्ति है जो वस्तुओं एवं तथ्यों को समझने, उनमें आपसी सम्बन्ध खोजने तथा
तर्कपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने में सहायक होती है । आप सभी को गूगल सर्च इंजिन का
ज्ञान है जिसके माध्यम से आप मन माफिक जानकारी को खोज लेते हैं फिर उसका मनचाहा
उपयोग भी कर लेते हैं । उसी तरह डेटा माइनिंग में लगी हजारों कंपनीज़ और उसमें
कार्यरत लाखों की संख्या में साफ्टवेयर विशेषज्ञ जो गूगल से ज्यादा डेटा अपने पास
रखते हैं वे सब मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दिमाग बन जाते हैं । आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस वर्तमान में गूगल सर्च इंजन से ज्यादा मजबूत और ताजा तथा टिकाऊ डेटा
बैंक से पोषित तकनीक है।
यह आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस कैसे काम करता है
How does this artificial intelligence work
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काम कैसे करता
है । वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कई उत्पाद विभिन्न विधाओं के लिए
उपयोग में पहले से हैं । अवगत हो कि स्पेस, मिलेट्री,मेडिकल
जलयान, वायुयान, आटोमोबाइल से लेकर रिसर्च के क्षेत्रों
में यह टेक्नोलाजी पहले से ही उपयोग में चल रही है लेकिन कोरोना के बाद इसका उपयोग
मानव की बौद्धिक क्षमता के मुक़ाबले के लिए विकसित करने की बात तेजी से चल पड़ी है ।
वर्तमान में प्रयोगिक तौर पर “चैट जीपीटी” नाम
से फ्री वेयर के रूप में लोग इसका प्रयोग रिसर्च आदि के लिए कर भी रहे हैं । इसी
उत्पाद का प्रयोग प्रोफेशनल अपने कार्यों को और चमकाने के लिए कर रहे हैं ।
मौलिकता के लिए खतरे की घंटी है - नयी चुनौतियाँ
The alarm bells for originality - new challenges
गौर तलब है की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने आज मौलिक सृजन पर चुनौतियों के बादल घने कर दिये हैं । इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला वह वर्ग है जो किसी भी विधा में मौलिक सृजन में खुद को खपाये हुए है । वे चित्रकार , मूर्तिकार , वास्तुकार , कवि – लेखक कुछ भी हो सकते हैं । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नयी ताजा तकनीकी ने जहां एक तरफ तमाम देश की सरकारों के नीति निर्धारकों की नींद उड़ा रखी वहीं दूसरी तरफ लीगल मुद्दों पर भी डिबेट होने लगी है । इन सबके बीच मौलिक सृजन कर रहे असंख्य रचनाकर और उनसे जुड़े बड़े व्यवसाय भी भ्रमित हो रहे हैं ।

लेख लिखने के लिए प्रोत्साहित करने वाले सभी मित्रों को आभार धन्यवाद ।
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