ए॰आई का ज्ञान मसाला - कितना उजला कितना काला...The Story of Surface web,Deep web and Dark Web connection with AI
सरफेस- डीप और डार्क वेब के आधार पर
ए॰आई का ज्ञान मसाला - कितना उजला कितना काला...
The Story of Surface web,Deep web and Dark Web connection with AI
क्या है एआई का ज्ञान मसाला /
ए॰आई का ज्ञान मसाला
- कितना उजला कितना काला । आज का टापिक रोचक होने
वाला है । ए॰आई के कारण आजकल सभी इंडस्ट्री में अचानक प्रोम्ट इंजीनियर की ग्लोबल
वेकेन्सी में तेजी के साथ इजाफा हुआ है । इंडस्ट्रीज अपने कोर स्टाफ में उन लोगों
को भर्ती करने की योजना पर काम कर रहीं हैं जो ए॰ आई के उपयोग से उनके प्रोडक्ट और
सेवाओं को तुरत फुरत उच्चकोटी का बना सकें । लेकिन यह कितना तर्क पूर्ण और फायदे
की बात होगी इस पर अभी चिंतन की अवश्यकता है ।
ए॰आई
के संबंध में एक पुरानी कहावत को संदर्भ में रखता हूँ । जिसके अनुसार ऐसा कहा गया
है कि मूर्ख दोस्त हमेशा बुद्धिमान दुश्मन से ज्यादा खतरनाक होते हैं । मूर्खता जोखिम
को आमंत्रित करती है । ए॰आई को हम बुद्धिमान दोस्त समझ रहें हैं लेकिन यदि वह
विपरीत आचरण करे तो यह बेहद जोखिम पूर्ण होगा । निश्चित रूप से कहावत चरितार्थ हो जाएगी ।
सभी
जानते हैं कि मशीनी ज्ञान वस्तुतः उसकी डिजाइन का पार्ट होता है जिसमें जो जानकारी
उसमें डाली जाती है वह उसी के आधार पर विश्लेषण करती है और आपको परिणाम से अवगत
कराती है । इसे आप कैलकुलेटर के उदाहरण से आसानी समझ सकते हैं । इसी तरह आर्टिफ़िशियल
इंटेलिजेंस भी उसी जानकारी के आधार पर विश्लेषण और परिणाम करता है , जो उसके अंदर पहले से संकलित है । आज मै आपको इस कृतिम बुद्धिमानी के
पीछे के संकलित ज्ञान भंडार के विषय में जानकारी दे रहा हूँ । जो वास्तविक रूप से इंटरनेट
का वह वेब संसार है जिसके विषय में इंटरनेट के प्रयोग कर्ता को जानकारी नहीं है । संलग्न
चित्र के माध्यम से इसको समझने का प्रयास किया जा सकता है ।
वेब
वर्ल्ड यानि वेब संसार में पूरी दुनिया के इंटरनेट प्रयोग कर्ताओं के अरबों डेटा
संग्रहीत हैं । ये डेटा तस्वीर, वीडियो, शब्द, अंक या डिजाइन से संबन्धित आंकड़े कुछ भी हो
सकते हैं। अमूमन सामान्य प्रयोग कर्ता
जहां इंटरनेट की निशुल्क सेवाएँ ले रहा है वह सरफेस वेब कहा जाता है । निशुल्क
यानि फ्री चलने वाले सभी ईमेल एकाउंट ,फेसबुक , व्हाट्सएप, टीवीटर, यू ट्यूब , इन्स्टाग्राम एवं ब्लॉगर आदि सोशल मीडिया का सम्पूर्ण डेटा इसी सरफेस वेब
पर स्थायी रूप से संग्रहीत है और सारे सर्च इंजिन की पहुँच इस सरफेस तक हमेशा रहती
है । बिना रोक टोक के इस डेटा का कोई भी उपयोग कर सकता है बशर्ते उस पर कोई कापी
राइट या मूल्य का चुकता करना अनिवार्य न किया गया हो । गूगल – बिंग आदि सर्च इंजिन
के माध्यम से यह दुनिया के किसी भी कोने में बैठ कर खोजी जा सकती है । समुद्र के
ऊपर तैर रहे जहाज की तरह सरफेस वेब में इंटरनेट का समस्त डेटा संरक्षित होकर तैरता
रहता है, ऐसा हम कह सकते हैं ।
डीप
वेब / What is deep web
दूसरा
वेब वर्ल्ड का स्तर जिसे हम डीप वेब कहते हैं । यह निर्धारित शुल्क अदा करने के
बाद ली जा रही वह इंटरनेट की सेवाएँ हैं जिन्हे समस्त सरकारी , गैर सरकारी , वैधानिक संस्थाएं , इंडस्ट्रीज और प्रोफेशनल लोग लिया करते हैं । यह बेहद महत्वपूर्ण एवं
पासवर्ड से सुरक्षित डेटा है जिस तक केवल अधिकृत व्यक्ति या संस्था ही पहुँच सकते
हैं । रिसर्च संस्थाओं की गतिविधियां , सामरिक संस्थाओं के
निर्णय , व्यापारिक और आर्थिक जगत यानि शेयर मार्केट , बैंक आदि महत्वपूर्ण संस्थाओं की भागीदारी से यह डीप वेब का डेटा तैयार
होता है । विभिन्न फायर वाल , एंटीवायरस , स्पैम , हैकर आदि से सुरक्षित विशेष कवच वाले इस
डीप वेब से पूरी दुनिया का प्रशासन और सरकारे चल रही हैं ऐसा आप मान सकते हैं । यह
समुद्र के भीतर सामान्य पहुँच तक स्थित है इसलिए इसे डीप वेब कहा जाता है ।
डार्क
वेब / What is dark web
तीसरा
और उक्त दोनों वेब वर्ल्ड से कई गुना विशाल और भारी भरकम वेब वर्ल्ड जिसका नाम
डार्क वेब है, यह अपने नाम के अर्थ के अनुसार ही
अंधेरे में रहने वाला डेटा संसार है । जितना सरफेस वेब सफ़ेद है उतना ही यह डार्क-वेब ग्रे है।
शब्द
"डार्क वेब" इंटरनेट के एक छिपे हुए और एन्क्रिप्टेड हिस्से को संदर्भित
करता है जिसे पारंपरिक खोज इंजन द्वारा इंडेक्स करना संभव नहीं है और इस तक पहुँच
बनाने के लिए विशेष सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता होती है, जैसे कि टोर ब्राउज़र कहते हैं । "डार्क वेब" इंटरनेट अक्सर
गुमनामी से जुड़ा होता है और अवैध गतिविधियों से जुड़े होने के कारण इसने कुख्याति
प्राप्त की है। इसे ग्रे डेटा भी कहते हैं ।
डार्क
वेब के प्रयोग कर्ता एक प्रतिबंध के अंतर्गत गोपनीय सक्रियताओं का संचालन इस डार्क
वेब में बिना भय और अंजाम की परवाह किए करते आ रहे हैं । नीति – नियम – आदेश , मानवीयता एवं नैतिकता जैसे शब्दों और अर्थों से खुद को अलग रखते हुए , इंटरनेट की दुनिया का यह सबसे खूंखवार भाग है । इस पर सूक्ष्म निगरानी
रखने वाली संस्थाएं जब तब हैकर को धर दबोचने , नशीले पदार्थ
के रैकेट तोड़ने या आतंकी ठिकानो को ध्वस्त
करने के दौरान इस डार्क वेब की दुनिया तक पहुँचने का प्रयास भर कर पा रहीं हैं ।
यह तकनीकी रूप से वैश्विक अक्षमता का एक बड़ा उदाहरण है कि इससे और ज्यादा पहुँच
बना पाना इन निगरानी रखने वालों की ताकत से बाहर की बात है ।
डेटा
भंडारण – रखरखाव / DETA storage & maintenance
उक्त
तीनों इंटरनेट के स्तरों में अरबों सूचनाएँ संग्रहीत हैं , यही वह डेटा का विशाल खजाना है जहां ए॰आई की पहुँच बन रही है । विश्व भर
में लाखों की संख्या में विशालतम कंप्यूटर सर्वर में संग्रहीत यह अति विशाल डेटा
का रख रखाव बहुत ही सुरक्षित तरीके से किया जा रहा है । वैश्विक सूचनाओं को तमाम
प्रतिलिपियों के द्वारा पूरे विश्व की तमाम भौगोलिक विषमताओं के बीच सम्हाल कर
रखना विश्व की बड़ी शक्तियों के हाथ में है । बड़ी ताकतों में प्रमुख देश अमरीका, चीन, रूस , इजरायल का नाम
लिया जा सकता है । अवगत हो कि भारत सरकार ने अभी हाल ही में डेटा संरक्षण बिल
मानसून सत्र में अनुमोदित किया है जिसके द्वारा डेटा का रखरखाव और भंडारण देश के
बाहर किया जा सकता है और इसके दुर्पयोग और निजिता के भंग होने पर दंड का प्रावधान
किया गया है ।
उपसंहार
– Conclusion
सरफेस-
डीप और डार्क वेब के आधार पर ए॰आई का अकूत ज्ञान - कितना उजला कितना काला...भविष्य
की चुनौती बन सकती है । आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस उक्त तीनों डार्क वेब में संग्रहीत
सूचना तक अपनी पहुँच बना कर अपने परिणामों से विश्व को कितना लाभ और कितना नुकसान
में पहुंचा देगा यह तो अभी नहीं कहा जा सकता है । लेकिन यह तय है कि बड़े परमाणु
बमों के जखीरे पर बैठी दुनिया के प्रबुद्ध वर्ग और वैज्ञानिकों तथा मानव अधिकारों
की पैरवी करने वाले अभी से जाग जाएँ तभी इन चुनौतियों को संबोधित किया जाना संभव
होगा ।
- - अवधेश सिंह [ लेखक, दूरसंचार विभाग के अंतर्गत सूचना तकनीक, कंप्यूटरी करण, सेल्यूलर मोबाइल स्वीचिंग विधा के विशेषज्ञ रहे है ] [9450213555]

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