अन्तरिक्ष से एलियन तक - आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस बना मददगार / Reach from space to aliens - Artificial Intelligence becomes helpful

 अन्तरिक्ष से एलियन तक - आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस बना मददगार

AI and aliens
STORY IDEA- Artificial intelligence (AI) has been playing an increasingly significant role in space research and exploration. AI inventions are ready to provide new ways of contact with space and aliens. "Breakthrough Listen" is a scientific program launched in 2015 with the goal of discovering intelligent extraterrestrial life in the universe. This is one of the most extensive searches ever for alien communications. The existence of extraterrestrial life forms, often referred to as "aliens", is a major area of present ​​space research.

अभी पिछले दिनो, टीवी चैनल द्वारा लाइव प्रसारण द्वारा भारत के चंद्र अभियान ने पूरे देश को वैज्ञानिक कौतूहल से लंबी अवधि तक जोड़े रखा । हर आम और खास अपनी समझ और सोच के तरीके से इस महत्वकांक्षी अभियान को देख रहा था और भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई दे रहा था । यह भारत के लिए नए युग की शुरुआत है जबकि अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी दखल रखने वाले शीर्ष देश, त्वरित लाभ न देने के कारण इस प्रकार के अभियान को 50 वर्ष पूर्व , 1972 के दौरान ही ठंडे बस्ते में डाल चुके हैं । वर्तमान में ये सभी देश अन्तरिक्ष के अबूझे रहस्यों से पर्दा उठाने के नए अभियान में व्यस्त हैं । ये सभी आधुनिक अन्तरिक्ष अभियान एक तरफ अन्तरिक्ष पर्यटन को लेकर व्यापारिक मंसूबों पर केन्द्रित हैं वहीं दूसरी तरफ उड़न तस्तरी और उनको संचालित कर रहे एलियन्स को खोजने में लगे हैं। उक्त विकसित देशों के पूर्व अनुभव एवं उन्नत विशेषज्ञता के साथ आज ए॰आई की करिश्माई मदद काम को आसान बना रहा है ।

गौरतलब है कि काल्पनिक दुनिया की कथाएँ कहने वाले लेखकों ने एलियन्स पर आधारित दर्जनो कहानियों को जन्म दिया है जिसे बच्चों से बड़ों तक के लाखों लोगों ने पसंद भी किया है । अब इस कल्पना के बीच हकीकत के धागे पकड़ने की पुरजोर कोशिश हो रही है । इस खोज के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मददगार साबित हो रहा है । क्या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से वैज्ञानिकों को ऐसे कुछ रास्ते मिल जाएंगे जिनसे एलियन्स की उपस्थित , पहचान और उनके द्वारा छोड़े गए चिन्हों , संदेशो को डिकोड करना संभव होगा । मै बतौर आई टी इंजीनियर इस बात को कल्पना के सहारे कहानियाँ लिखने वालों की तरह इस संभावना को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं कर रहा हूँ । लेकिन कुछ निम्न लिखित तथ्यों की चर्चा अवश्य करूंगा जिसके द्वारा उक्त संभावना बलवती हो रही है ।

1. मानव रहित यान का संचालन स्वतः नियंत्रित वायुयान , मानव रहित यान , मानवरहित अन्तरिक्ष यान आदि का संचालन दो प्रकार से होता है । पहला तरीका रिमोट सेन्सिंग से कंट्रोल का है, दूसरा तरीका स्वतः नियंत्रण का है । ए॰आई सिस्टम का उपयोग नेविगेशन से लेकर गोपनीय उड़ानों के प्रबंधन में सफलता पूर्वक किया जा रहा है । इस प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप नहीं है । कहना चाहता हूँ कि लंबी अवधि तक बिना ईधन और मानवीय हस्तक्षेप के इस प्रकार के उड़न खटोले का दूसरा रूप ही उड़न तस्तरी है । ए॰आई एल्गोरिदम अंतरिक्ष यान नेविगेशन के लिए सबसे उपयुक्त पथ निर्धारित करने में सहायता करते हैं, विशेष रूप से भटक रहे खगोलीय पिंड से रक्षा करने में भी यह बेजोड़ सहायक है। 

2. संदेश, चिन्ह, ध्वनि आदि की पहचान ए॰आई द्वारा इस दुर्गम खोज के लिए संदेश, चिन्ह, ध्वनि आदि की पहचान या विश्लेषण संभव हो गया है । अंतरिक्ष यान, पर्वतों की ऊंचाइयों पर स्थापित दूरबीन और चंद्रमा पर चहलकदमी करते रोवर्स द्वारा कैप्चर की गई छवियों का विश्लेषण करने के लिए ए॰आई एल्गोरिदम को नियोजित किया जाता है। वे आकाशीय पिंडों की पहचान करते हैं, ग्रहों की भौगोलिक  विशेषताओं का विश्लेषण करते हैं और नए खगोलीय पिंडों या वस्तुओं की खोज में भी मदद कर रहे हैं।

3. आंकड़ों का संग्रह और विश्लेषण: ए॰आई अंतरिक्ष मिशनों से एकत्र किए गए भारी मात्रा में संकलित डेटा को संशोधित-व्यवस्थित करता है । इसमें सिग्नल से आवाज को फ़िल्टर कर पकड़ना, फीचर और ध्वनि या रोशनी के पैटर्न की पहचान करना और मूल डेटा से सार्थक जानकारी निकालना जैसे कार्य भी शामिल हैं । सर्च फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस (एसईटीआई) जैसे कार्यक्रम रेडियो सिग्नल के लिए आसमान को स्कैन कर रहे हैं जो बुद्धिमान अलौकिक सभ्यताओं की उपस्थिति का संकेत दे सकते हैं। इसी प्रकार एक्सोप्लैनेट अन्वेषण के द्वारा अन्य तारों के रहने योग्य क्षेत्र में एक्सोप्लैनेट (हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रह) की खोज ने जीवन के लिए उपयुक्त परिस्थितियों वाले ग्रह खोजने की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

4. अन्तरिक्ष और पृथ्वी के बीच संचार -  अन्तरिक्ष और पृथ्वी के बीच संचार उस वक्त बेहद आवश्यक होता है जब अन्तरिक्ष यात्रियों से पृथ्वी स्थित कंट्रोल परिसर संवाद स्थापित करता है । ए॰आई द्वारा एक लाजिकल भाषा का निर्माण इस काम को सरल कर रहा है । यह तरीका हमें एलियन से भी संवाद स्थापित करने में मदद कर सकता है । यह संवाद तब महत्व का बन जाता है जब ए॰आई का उपयोग अंतरिक्ष यान प्रणालियों की निगरानी और मेंटीनेंस के लिए किया जाता है। टेलीमेट्री डेटा का विश्लेषण करके, एआई भविष्यवाणी कर सकता है कि यंत्रीय डिवाइस  कब विफल हो सकते हैं, इससे महत्वपूर्ण अन्तरिक्ष अभियानो में आने वाली विफलताओं के जोखिम को कम करता है।

इसी कड़ी में हमने देखा कि भारत के सफल चन्द्र अभियान में विक्रम लैंडर एवं प्रज्ञा रोवर को देश में स्थित वैज्ञानिक लगातार संचालित कर रहे थे । रोवर्स जैसे रोबोटिक सिस्टम को नियंत्रित करने में ए॰आई महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह उन्हें नेविगेट करने, बाधाओं से बचने और दूरस्थ और कठोर वातावरण में स्वतः निर्णय लेने के काबिल बनाता है। कक्षा में उपग्रहों और अंतरिक्ष यान की बढ़ती संख्या के साथ, ए॰आई का उपयोग अंतरिक्ष यातायात को प्रबंधित करने, संभावित टकरावों की भविष्यवाणी करने और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने में मदद के लिए किया जाता है।

उपसंहार ब्रेकथ्रू लिसन, यह ब्रह्मांड में बुद्धिमान अलौकिक जीवन की खोज के लक्ष्य के साथ 2015 में शुरू किया गया एक वैज्ञानिक कार्यक्रम है। यह एलियन संचार के लिए अब तक की सबसे व्यापक खोजों में से एक है। अंतरिक्ष में उपस्थित अलौकिक जीवन रूप जिन्हें अक्सर "एलियंस" कहा जाता है, इसका अस्तित्व अंतरिक्ष अनुसंधान का एक बड़ा महत्व पूर्ण क्षेत्र है । जब तब विश्व के किसी कोने से एलियन की उपस्थिती की खबरे आती रहती हैं जिनके पुष्टीकरण और सत्यापन में ए॰आई का एकीकरण वैज्ञानिकों की क्षमताओं को बढ़ाता है । अभी तक एलियन को लेकर कोई सत्यापन नहीं है लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि ए॰आई की नयी सुविधा और अंतरिक्ष अनुसंधान के पुराने अनुभव ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ को आगे बढ़ा रहा है।

 

-    अवधेश सिंह [ लेखक, दूरसंचार विभाग के अंतर्गत सूचना तकनीक, कंप्यूटरी करण, सेल्यूलर मोबाइल स्वीचिंग विधा के विशेषज्ञ रहे है ] [9450213555]

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